Red Paper
Contact: +91-9711224068
  • Printed Journal
  • Indexed Journal
  • Refereed Journal
  • Peer Reviewed Journal
International Journal of Sociology and Humanities
Peer Reviewed Journal

Vol. 7, Issue 1, Part E (2025)

महाभारत के शान्तिपर्व में धर्म दर्शन का सामान्य अध्ययन

Author(s):

रमेश चन्द्र बैरवा

Abstract:

आज धर्म का नाम आते ही व्यक्ति के दिमाग में सम्प्रदाय का विचार जन्म ले लेता है। कारण कि हमारी संस्कृति, राष्ट्र और भारतीयता के प्रति शिक्षा मे कोई स्थान नहीं रहा। धर्म वह नही है कि सिर्फ व सिर्फ दास प्रथा को कायम करे। धर्म वह है जो स्वतन्त्र-अनुसासित, राष्ट्र प्रेम से सुसज्जित विचार धारा को जन्म दे। यह तभी सम्भव है जब हर भारत वासी सम्प्रदाय से उपरम हो जाय। धर्म को दो भाग में विभाजित कर अध्ययन की आवश्यकता है। एक तो सन्यास धर्म जो भारत की प्राचीन संस्कृति से सम्बन्ध रखता है। दूसरा देश, काल और समाज की दृष्टि से जो राष्ट्रवादी विचार धारा को स्वीकार करता है। धर्म वह है जिससे समाज, राष्ट्र और संस्कृति का उत्तरोत्तर विकास हो जो एक सबल मानव समाज का साम्राज्य स्थापित कर सके। प्राचीन समय में ऋषियों ने वर्ण धर्म की स्थापना किये किन्तु कालान्तर मे स्वार्थी तत्वों ने उसे जाति धर्म मे परिवर्तित कर अपना विचार जो स्वार्थ, संकिर्णता से तृप्त था, उससे समाज को दूषित कर दिया परिणाम स्वरूप जैन, बौद्ध, सिंख, इस्लाम, ईसाई आदि अनेक धर्म और जातियाँ बन गई। जो वर्ण कर्म प्रधान था वह जाति प्रधान हो गया। यह भारत जैसे महान देश की कमजोरी है, जिसके कारण देश को काफी समय तक गुलाम और परतन्त्र रहना पड़ा। धर्म का विशेष ज्ञान जो मानव जीवन के लिये या मानव समाज के लिये अमृत है अर्थात् जैसे इस स्थूल को प्राण की आवश्यकता है वैसे ही इस मानव समाज को धर्म की आवश्यकता है पर वह धर्म तो वेद, महाभारत, उपनिषद, पुराण आदि में पड़ा है, जिसका आज समाज मे नाम ही नही है जैसे यह अपनी सुषुप्त अवस्था में है। अब शान्तिपर्व मे धर्म और धर्म के स्वरूप के विषय मे 21 वे अध्याय में वर्णन किया गया है वैसे तो शान्तिपर्व के अनेकों अध्यायो मे इस पर बृहृद (विस्तार) से वर्णन है, जिसको आगे उल्लेखित किया गया है।

Pages: 384-388  |  617 Views  155 Downloads


International Journal of Sociology and Humanities
How to cite this article:
रमेश चन्द्र बैरवा. महाभारत के शान्तिपर्व में धर्म दर्शन का सामान्य अध्ययन. Int. J. Sociol. Humanit. 2025;7(1):384-388. DOI: 10.33545/26648679.2025.v7.i1e.176
Journals List Click Here Other Journals Other Journals