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International Journal of Sociology and Humanities
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Vol. 8, Issue 1, Part A (2026)

पूंजी, श्रम और नैतिकता: बहुराष्ट्रीय निगमों में गांधीवादी न्यासिता सिद्धांत की प्रासंगिकता

Author(s):

Sujit Kumar and Doly Kumari

Abstract:

वैश्वीकरण और नव-उदारवादी आर्थिक व्यवस्था के विस्तार ने बहुराष्ट्रीय निगमों (Multinational Corporations – MNCs) को विश्व-अर्थव्यवस्था का केंद्रीय अभिनेता बना दिया है। पूंजी, प्रौद्योगिकी और श्रम पर इनके व्यापक नियंत्रण ने आर्थिक विकास को गति दी है, किंतु साथ ही श्रम-शोषण, सामाजिक असमानता और नैतिक संकट को भी गहरा किया है। इस संदर्भ में महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित न्यासिता सिद्धांत—विशेषतः श्रम और पूंजी के नैतिक संबंधों पर आधारित दृष्टिकोण—एक वैकल्पिक वैचारिक ढाँचा प्रस्तुत करता है। यह शोध-पत्र बहुराष्ट्रीय निगमों में पूंजी, श्रम और नैतिकता के अंतर्संबंधों का विश्लेषण गांधीवादी न्यासिता सिद्धांत के आलोक में करता है तथा यह मूल्यांकन करता है कि क्या यह सिद्धांत समकालीन कॉर्पोरेट व्यवस्था में प्रासंगिक और व्यवहार्य हो सकता है। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि न्यासिता सिद्धांत CSR की सीमाओं को पार कर कॉर्पोरेट नैतिकता को सामाजिक न्याय, श्रम-गरिमा और सहभागिता के आधार पर पुनर्स्थापित करने की क्षमता रखता है।

Pages: 12-15  |  46 Views  20 Downloads


International Journal of Sociology and Humanities
How to cite this article:
Sujit Kumar and Doly Kumari. पूंजी, श्रम और नैतिकता: बहुराष्ट्रीय निगमों में गांधीवादी न्यासिता सिद्धांत की प्रासंगिकता. Int. J. Sociol. Humanit. 2026;8(1):12-15. DOI: 10.33545/26648679.2026.v8.i1a.249
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